मैं शांति से लेट कर सो जाऊंगा, क्योंकि हे परमपिता परमात्मा तू ही मुझे आसरा देता है : ukjosh

मैं शांति से लेट कर सो जाऊंगा, क्योंकि हे परमपिता परमात्मा तू ही मुझे आसरा देता है


“मैं शांति से लेट कर सो जाऊंगा, क्योंकि हे यहोवा तू ही मुझे आसरा देता है।” इस एक वचन में एक गहरी आत्मिक सच्चाई निहित है। यह हमें आश्वासन देता है कि परमपिता परमात्मा ही हमारी वास्तविक शरण हैं, और जब हम अपनी चिंताओं, भय और आवश्यकताओं को उनके चरणों में समर्पित कर देते हैं, तो हमें पूर्ण शांति और सुरक्षा प्राप्त होती है। यह वचन हमें यह विश्वास दिलाता है कि परमपिता परमात्मा सदैव हमारे साथ हैं और हमें हर प्रकार के भय एवं चिंता से मुक्त रखते हैं।

परमपिता परमात्मा में शरण और विश्वास मैं शांति से लेट कर सो जाऊंगा

मनुष्य के जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएँ और चुनौतियाँ आती हैं। आर्थिक कठिनाइयाँ, पारिवारिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ एवं अन्य प्रकार के संघर्ष हमारे मन को विचलित कर सकते हैं। परंतु जब हम परमपिता परमात्मा पर अटूट विश्वास रखते हैं, तो वह हमें आश्वासन देते हैं कि हम निश्चिंत होकर विश्राम कर सकते हैं। मैं शांति से लेट कर सो जाऊंगा

परमपिता परमात्मा ने अपने वचन में यह प्रतिज्ञा की है कि वह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे और हमारी प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति करेंगे। जब हम अपनी सभी चिंताओं को उनके हाथों में सौंप देते हैं, तो वह हमें चिंता मुक्त जीवन जीने की सामर्थ्य प्रदान करते हैं।

“हे यहोवा, केवल आप ही मेरे जीवन की चिंता करते हैं,”—यह वचन दर्शाता है कि जब हम अपनी समस्याओं को प्रभु को समर्पित कर देते हैं, तो वह हमारी देखभाल करते हैं और हमें आंतरिक शांति प्रदान करते हैं।

परमपिता परमात्मा हमारे जीवन की सभी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं

मनुष्य के जीवन में अनेक प्रकार की आवश्यकताएँ होती हैं, जैसे:

  1. शारीरिक आवश्यकताएँ: भोजन, वस्त्र, और स्वास्थ्य।
  2. आर्थिक आवश्यकताएँ: आजीविका, व्यापार, और वित्तीय स्थिरता।
  3. भावनात्मक आवश्यकताएँ: शांति, प्रेम, और सुरक्षा।
  4. आत्मिक आवश्यकताएँ: आत्मा की शांति, पापों से मुक्ति, और परमपिता परमात्मा के साथ एक गहरा संबंध।

परमपिता परमात्मा ने वचन में वादा किया है कि वह हमारी सभी आवश्यकताओं को पूरा करेंगे, यदि हम उनके प्रति पूर्ण समर्पण एवं विश्वास बनाए रखें। हमें केवल अपने मन को उनकी ओर केंद्रित करने की आवश्यकता है। मैं शांति से लेट कर सो जाऊंगा

“हे परमपिता परमात्मा, मैं अपनी सभी आवश्यकताओं को आपके सक्षम हाथों में समर्पित करता हूं,”— यह प्रार्थना हमें स्मरण कराती है कि परमपिता परमात्मा हमारी आवश्यकताओं को भली-भांति जानते हैं और उन्हें पूरा करने में पूर्णतः सक्षम हैं।

परमपिता परमात्मा संकटों से बचाने वाले हैं

जीवन में हमें मुख्यतः तीन प्रकार के संकटों का सामना करना पड़ता है, जिनसे केवल परमपिता परमात्मा ही हमारी रक्षा कर सकते हैं:

  1. दैविक संकट: देवी-देवताओं, दुष्ट आत्माओं, अंधकार की शक्तियों तथा नकारात्मक विचारों के प्रभाव से उत्पन्न संकट।
  2. भौतिक संकट: आजीविका, नौकरी, व्यवसाय, तथा आर्थिक तंगी जैसी चुनौतियाँ।
  3. शारीरिक संकट: विभिन्न रोग, दुर्बलता, तथा शारीरिक कष्ट।

परमपिता परमात्मा ने हमें आश्वासन दिया है कि वह हमें इन सभी संकटों से बचाएंगे। जब हम प्रतिदिन प्रार्थना में उनसे सहायता मांगते हैं, तो वह हमें न केवल शारीरिक, बल्कि आत्मिक और मानसिक सुरक्षा भी प्रदान करते हैं। मैं शांति से लेट कर सो जाऊंगा

परमपिता परमात्मा का धन्यवाद और स्तुति

प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने जीवन में परमपिता परमात्मा द्वारा प्रदत्त आशीर्वादों को स्मरण करते हुए प्रतिदिन उनका धन्यवाद करें। जब हम सुबह जागते हैं, तो हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि परमपिता परमात्मा ने रात्रि भर हमारी रक्षा की और हमें एक नया दिन प्रदान किया।

“हे परमपिता परमात्मा, मैं आपकी स्तुति करता हूं क्योंकि आपने मुझे और मेरे परिवार को रातभर अपनी सुरक्षा में रखा,”— यह एक भावनात्मक अभिव्यक्ति है जो हमारी कृतज्ञता को दर्शाती है। मैं शांति से लेट कर सो जाऊंगा

दिनभर की योजनाओं, कार्यों और जीवन की सभी गतिविधियों को परमपिता परमात्मा को समर्पित करना न केवल हमें मार्गदर्शन प्रदान करता है, बल्कि हमारे हृदय में एक विशेष शांति भी उत्पन्न करता है।

विश्वास की शक्ति और परमपिता परमात्मा पर निर्भरता मैं शांति से लेट कर सो जाऊंगा

परमपिता परमात्मा ने अपने वचन में यह प्रतिज्ञा की है कि वह सदैव हमारे साथ रहेंगे और हमें किसी भी परिस्थिति में अकेला नहीं छोड़ेंगे। जब हम उनकी ओर निहारते हैं और उनके नाम पर भरोसा रखते हैं, तो हमें यह एहसास होता है कि जीवन के उतार-चढ़ाव में भी हमें घबराने की आवश्यकता नहीं है।

“हे यहोवा, मैं आपके वचनों पर भरोसा करता हूं कि आप मेरे साथ हैं,”— यह वचन हमें प्रेरित करता है कि हम हर परिस्थिति में परमपिता परमात्मा की ओर देखें और उनकी सामर्थ्य में विश्वास करें।

केवल परमपिता परमात्मा ही हमें वास्तविक सुरक्षा और शांति प्रदान कर सकते हैं। जब हम अपने भय, चिंताओं और जरूरतों को उनके चरणों में रखते हैं, तो वह हमारी देखभाल करते हैं और हमें पूर्ण शांति में विश्राम करने की शक्ति प्रदान करते हैं।

इसलिए, प्रत्येक दिन हमें परमपिता परमात्मा के प्रति आभार प्रकट करते हुए अपने जीवन को उनके सक्षम हाथों में सौंप देना चाहिए। इसी में हमारी वास्तविक शांति, सुरक्षा और उन्नति निहित है।

हे यहोवा, मैं तुझ पर भरोसा करता हूं और जानता हूं कि तू सदा मेरे साथ है।”


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